पहरन और उतरन में फर्क होता है
आंखें बंद करने से रात नहीं होती
अंधेर और अंधेरे में फर्क होता है
चेहरे पर लगा लो कितने भी नकाब
नजरे झुकाने और अदब में फर्क होता है आंखों की नामी बता देगी कितना भुलाया है
याद करने और यादों में फर्क होता है बेवजह लड़ते-लड़ते जिंदगी बीत जाती है जीने में और जिंदा रहने में फर्क होता है माना दुनिया विश्वास पर कायम है
पर सच में और सच्चाई में फर्क होता है जाने क्या हुआ है जमाने को
कहने और सुनने में फर्क होता है
धोने से भी नहीं निकलता कुछ दाग पहरन और उतरन में फर्क होता है
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