Thursday, 21 August 2025

पहरन और उतरन में फर्क होता है

धोने से भी नहीं निकलते कुछ दाग 
पहरन और उतरन में फर्क होता है 
आंखें बंद करने से रात नहीं होती 
अंधेर और अंधेरे में फर्क होता है 
चेहरे पर लगा लो कितने भी नकाब  
नजरे झुकाने और अदब में फर्क होता है आंखों की नामी बता देगी कितना भुलाया है 
याद करने और यादों में फर्क होता है बेवजह लड़ते-लड़ते जिंदगी बीत जाती है जीने में और जिंदा रहने में फर्क होता है माना दुनिया विश्वास पर कायम है 
पर सच में और सच्चाई में फर्क होता है जाने क्या हुआ है जमाने को 
कहने और सुनने में फर्क होता है 
धोने से भी नहीं निकलता कुछ दाग पहरन और उतरन में फर्क होता है 

No comments:

Post a Comment