मायूसी भागेगी धूप नही लगने दूँगा
सुबह से थोडी छांव उधारी हि सही
सांझ तक बस मुस्कुराते रहना
नादान हुँ मैं नादनियां करता हुँ
माफ करके मेरी नादानीयों पर
ठहाके लगाते रहना
मंज़िल की ओर चले है अभी तो
रोकेंगे लोग तुम्हे रुकना ना बढ़ते रहना
लोग चाहें जैसा चश्में वैसे ही
लगाते रहना
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