खीच लाती थी जो तेरी ओर
वो रूहानी सी खुशबू आज भी है
तेरे दिये हुए स्कार्फ में
काजल को स्याही बनाकर
लिखे होंगे उसने वो खत
जब भी पढता हुँ कुछ नया ही पाता हुँ
प्यार में डूबे खत कभी पुराने नही होते
बन्द आंखों से भी महसूस कर लेता हूँ
तेरे पास होने के अहसास को
सदियों से फूल ही है प्यार की निशानी
फ्रेम वही रहता है तस्वीरें बदल जाती हैं
महोब्बत में तोहफे कभी पुराने नही होते
तुमसे हूँ, तुम्हरा ही रहूँगा सदा
जब जी चाहे आजमा लेना
ऊम्र की आंच पर रिस्तों को सेक लो
बिना विशवास के रिश्ते श्याने नही होते
जब भी पढता हुँ कुछ नया ही पाता हुँ
प्यार में डूबे खत कभी पुराने नही होते
गीत, गजल सब फीके लगते हैँ
चाहो तो मुहोब्बत शब्द हटा कर देख लो
कुछ भी लिख लो, कैसे भी लिख लो
बिना प्यार के मिश्रे सुहाने नही होते
जब भी पढता हुँ कुछ नया ही पाता हुँ
प्यार में दुबे खत कभी पुराने नही होते
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