रंग कोई लगाता नहीं हूं
मैंने देखा है छुईमुई को शरमाते हुए
छू लूं तो गुनाह हो जाए
खुबसूरती की क्या बात करें
कहां से इतने गुलाब लाएं वह सजता सवारता इतना है
हम आईना हो जाए तो गुना हो जाए जिसने भी देखो जमाने की बात करता है शहर न देखा, घर न देखा,
हर आंगन में रोशनी
हर छत पर चांद है
अपनी ही बात हो तो गुनाह हो जाए
मैंने सुना है उसने आंचल में छुपा रखे हैँ सितारे
सितारों का अपना ही नूर है
ऐसे में आंखें भी बंद कर लूं तो गुनाह हो जाए
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