tulsiram
Saturday, 18 April 2020
जूतों में सफर की धूल
जहां चाहो बना लो आशियाना
जूतों में सफर की धूल इतनी हो
जो भी करो हद तक करो
चलो तो गुबार दूर तक जाए
कदमों की आहट इतनी हो
बिन बुलाए ही चले आए चाहने वाले
मिलने की दिल में चाहत इतनी हो
जहां चाहो बना लो आशियाना
जूतों में सफर की धूल इतनी हो
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