Friday, 16 January 2026
15 तुम्हारी जिंदगी में कोई ऐसा है के नही
Wednesday, 14 January 2026
14 प्रकृति की पुकार
Monday, 12 January 2026
जरूरी काम जो करने हैं
Saturday, 3 January 2026
मेरे कार्य के बारे में
गाँव केवल मिट्टी के घरों या कच्चे रास्तों का समूह नहीं है, बल्कि यह उस जीवन ऊर्जा का स्रोत है जिससे मानवता जीवित है। यदि शहर को शरीर माना जाए, तो गाँव उसकी आत्मा है। शरीर कितना भी भव्य क्यों न हो जाए, बिना आत्मा के वह निष्प्राण है।
1. अन्न और पोषण का उद्गम
शहर की गगनचुंबी इमारतों के बीच जो थाली सजती है, उसका हर दाना गाँव की पसीने से भीगी मिट्टी की कहानी कहता है। शहर उपभोग का केंद्र है, लेकिन गाँव सृजन का। जब तक गाँव के खेतों में हल चलता है, तब तक शहर की रफ्तार बनी रहती है। पानी की तरह भोजन भी एक बुनियादी ज़रूरत है, और इस ज़रूरत की पूर्ति गाँव के बिना असंभव है।
2. संस्कृति की जड़ें
सभ्यता और संस्कृति का जन्म किसी कंक्रीट के जंगल में नहीं, बल्कि प्रकृति की गोद में हुआ है। हमारे लोकगीत, परंपराएं, त्योहार और आपसी भाईचारे की भावना गाँव की गलियों में ही पनपी और विकसित हुई हैं। शहर अक्सर इन परंपराओं का अनुसरण करते हैं, उन्हें उत्सवों के रूप में दोहराते हैं, लेकिन उन परंपराओं की शुद्धता और उनका असली 'रस' आज भी गाँव की मिट्टी में सुरक्षित है।
3. सादगी और संतुलन
आज जब दुनिया 'सस्टेनेबिलिटी' (सतत विकास) की बात कर रही है, गाँव सदियों से उस जीवनशैली को जी रहे हैं। प्रकृति के साथ कैसे तालमेल बिठाकर जिया जाता है, यह गाँव सिखाते हैं। गाँव हमें सिखाते हैं कि 'बुनियादी ज़रूरतें' कम से कम संसाधनों में भी सम्मानजनक तरीके से पूरी की जा सकती हैं।
4. शहर का मार्गदर्शक
शहर को आधुनिकता और तकनीक पर गर्व हो सकता है, लेकिन मानवीय संवेदनाओं और जुड़ाव के लिए उसे हमेशा गाँव की ओर देखना पड़ता है। जब शहर की भीड़भाड़ और शोर व्यक्ति को थका देते हैं, तब गाँव की शांति ही उसे पुनर्जीवित करती है।
मिट्टी का विलाप और सृजन: कला के आईने में
मेरी कला में मिट्टी के जो उभार और छिद्र (apertures) आप देख रहे हैं, वे केवल खाली जगह नहीं हैं, बल्कि वे बुनियादी ज़रूरतों की पुकार हैं।
मिट्टी और मनुष्य का नाता: जैसे गाँव शहर का पेट भरता है, वैसे ही यह मिट्टी हमारे अस्तित्व का आधार है। इन कलाकृतियों में बने छोटे-छोटे पात्र और गोलाकार आकृतियाँ उस 'गर्भ' या 'मिट्टी के चूल्हे' की याद दिलाती हैं जहाँ जीवन पकता है।
ऑर्गेनिक प्रवाह: इन आकृतियों का कोई निश्चित कोना नहीं है, ठीक वैसे ही जैसे प्रकृति और गाँव का जीवन सरल और तरल होता है। शहर की ज्यामिति (geometry) सीधी लकीरों और कंक्रीट में कैद है, लेकिन मेरी कला के ये 'ऑर्गेनिक फॉर्म्स' उस आज़ाद और प्राकृतिक जीवन का प्रतिनिधित्व करते हैं जो केवल गाँवों में संभव है।
संस्कृति का संचय: इन कलाकृतियों में एक के ऊपर एक सजे हुए पात्र और बीज रूपी आकृतियाँ दर्शाती हैं कि कैसे एक संस्कृति दूसरी को सहारा देती है। गाँव वह नींव का घड़ा है, जिस पर आधुनिक सभ्यता का पूरा ढांचा टिका हुआ है।
गाँव: सभ्यता का अक्षय पात्र
पानी के घड़े की तरह गाँव भी एक अक्षय पात्र है। शहर अपनी सारी भव्यता के बाद भी अंततः शांति और शुद्धता के लिए इन्ही जड़ों की ओर लौटता है। मेरी कला इन छिद्रों के माध्यम से शहर को याद दिलाती है कि अपनी चमक-धमक के बीच वह उस 'मिट्टी' को न भूले जिसने उसे जन्म दिया है।Today the whole world is going through a terrible situation it seems to me that today we are standing on a mound of dead and some people are still unaware of this danger.Such people would be present in every corner of the world. To illustrate this time I have divided my sculpture into three parts.
I think three types of people have special involvement in this time.
And in the middle i have kept those people who are taking their responsibilities with full loyalty and honesty like doctors, nurses, police
At the bottom, I have placed those people who have knowledge of their responsibilities, they think about society, nation and world Who are fulfilling their responsibilities at home and are safe.
On the top floor I have shown the people who are sick in hospitals and have died.
Apart from this, in any of my artwork, I do not keep the shapes furnished, well crafted, every line has its own flow.
I see all the characters in my artwork as shadows that can be long, can also be small, can be ugly and can be crooked.
Friday, 2 January 2026
12 तुम बिन
सितारे चमकते हैं पहले की ही तरह रातें भी गुजरती हैं सवेरे की ही तरह मगर नींद आँखों से जैसे खफा है तेरी यादों का ही बस हर तरफ पहरा है पर तुम बिन कुछ अधूरा सा है