सचमुच की परियों के पंख नही होते
पर एसे ही हस्ती है दिल को छू जाती हैं
स्वपन की दुनिया का एहसास कराती हैं
सचमुच की परियों के पंख नही होते
पर एसी हि होती हैं
जब तेरी तस्वीर बनाऊगा मैं
तो शायद पंख लगाऊंगा मैं
दूर हि रहती है और खुब सताती हैं
जब तेरी तशवीर बनाऊंगा में तो शायद पंख लगाऊंगा
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