अपनों से दूर होते हैं, तो मिटटी याद आती हैं तो मिटटी के घरोंने याद आते हैं, तो मिटटी के खिलोने याद आते हैं
श्री खाटू श्याम व सालासर बाला जी घूमने गए, तो रतनगढ़ से हमारी रेल थी तो रतनगढ़ भी घूमने का मौका भी मिला जो की मेरे लिए शोभाग्य की बात थी यहाँ की पुरानी ईमारातें वाकई देखने लायक हैं!
इन्हे इतनी बारीकी से तराशा गया था पर अब ये खंडहर हो चुकी हैं अक्सर लोग यहाँ घूमने नहीं आते वहां के लोकल लोगों का कहना था यहाँ घूमने को कुछ नहीं हैं पर इतनी खूबसूरत ईमारतें देखकर मैं हैरान था वही की कुछ तशवीरें ली जो बहुत खूबसूरत हैं जितना देखा उतना तो फोटो में दिखाना असंभव हैं