Friday, 22 August 2025

खुश रहने की आदत

खुश रहने की आदत यूं ही नहीं है हमें मैंने इसकी गम के आंसुओं से कीमत चुकाई है बदनाम हुआ हर पत्थर आकर मुझे लगा हर पत्थर से ठोकर खाई है आशिक के नाम से मशहूर आज ये शोहरत मैंने यूं ही ना पाई है खुश रहने की आदत यूं ही नहीं है इसकी गम के आंसुओं से कीमत चुकाई है  तुमसे जुदा होकर कितनी बार मौत को गले लगाया है जाने क्यों मौत से बड़ी है ये जुदाई है खुश रहने की आदत यूं ही हहज नहीं है हमें इसकी गम के आंसू मत चुकाए हैं

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