क्या कभी सोचा है तुमने
सोचता हूं कभी-कभी चहेकते हैं पंछी
या कोई राग सिखाते हैं
हम क्यों नहीं समझ पाते इनको
इस छत से उस छत उड़ते फिरते हैं
इनकी सुबह कितनी सुंदर होती है
भोर का सूरज भी देखो कितना सुंदर होता है
मुस्कुरा रहा हो जैसे
बादल भी रंग बदलते हैं
हमारी नजरों पर जाने कैसी धुंध सी छाई है
जो हटती नहीं हम कितना अनदेखा करते हैं
सुबह कितनी सुंदर होती है
ऐसे समझ ना पाओगे इनको
सुनने समझने से पहले खुद से बातें करते फिर सुनते हैं पंछीयों का चहकना
सूरज से बातें करते हैं
प्रकृति हर सुबह क्लास लेती है
पर बहुत लोग बंक पर होते हैं
यह कक्षा कितनी सुंदर होती है
सुबह कितनी सुंदर होती है
जितना देखो उतनी सुंदर होती है
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