हवाओं से कह दो अपनी ओकात मैं रहें
हमारे चिराग अब तूफान मैं जलना सीख रहे हैं
आसमान से कह दो अपना कद और ऊँचा कर ले
हमारे पंछी अब उड़ना सीख रहे हैं
उन चाँद सितारों से भी कह दो बढ़ा लें रौशनी अपनी
हमारे तारे भी अब चमकना सीख रहे हैं
ओंधे मुह गिरोगे अब तो सरहद पर दुसमन से कह दो
मेरे देश के बच्चे तिरंगे को लहराना सीख रहे हैं
लिखने को हो जाएँ तैयार कलमकारों से कह दो
हजारों हाथ दुनिया को मुट्टी में भरना सीख रहे हैं
शिक्षा तभी होगी ये साक्षर जाकर हर नजर से कह दो हम माँ,
बहन और बेटी की इज्जत करना सीख रहे हैं
कवि - तुलसी राम प्रजापति
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