Thursday, 21 August 2025

उड़ना सिख रहे हैं

हवाओं से कह दो अपनी ओकात मैं रहें
हमारे चिराग अब तूफान मैं जलना सीख रहे हैं

आसमान से कह दो अपना कद और ऊँचा कर ले
हमारे पंछी अब उड़ना सीख रहे हैं

उन चाँद सितारों से भी कह दो बढ़ा लें रौशनी अपनी 

हमारे तारे भी अब चमकना सीख  रहे हैं

ओंधे मुह गिरोगे अब तो सरहद पर दुसमन से कह दो
मेरे देश के बच्चे तिरंगे को लहराना सीख रहे हैं

लिखने को हो जाएँ तैयार कलमकारों से कह दो
हजारों हाथ दुनिया को मुट्टी में भरना सीख रहे हैं

शिक्षा तभी होगी ये साक्षर जाकर हर नजर से कह दो हम माँ,

 बहन और बेटी की इज्जत करना सीख रहे हैं

कवि - तुलसी राम प्रजापति



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