Thursday, 21 August 2025

शराब

मेरा वजूद कुछ नहीं 
मेरी शक्शियत कुछ नहीं
फिर भी झुकता है जहां मेरे कदमों में 
मिट गए मेरे साथ रहने वाले 
मुझे हम कदम कहने वालों के कदम अब कदम ना रहे 
जो आग थे कभी बुरा हो गए
लाखों में रहने वाले खाक हो गए 
दुनिया कितनी भी सफाई दे 
दुनिया कितनी भी दुहाई दे 
फिर भी खराब हुं मैं 
शराब हुं मैं 
जी हाँ शराब हुं मैं

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