मेरी शक्शियत कुछ नहीं
फिर भी झुकता है जहां मेरे कदमों में
मिट गए मेरे साथ रहने वाले
मुझे हम कदम कहने वालों के कदम अब कदम ना रहे
जो आग थे कभी बुरा हो गए
लाखों में रहने वाले खाक हो गए
दुनिया कितनी भी सफाई दे
दुनिया कितनी भी दुहाई दे
फिर भी खराब हुं मैं
शराब हुं मैं
जी हाँ शराब हुं मैं
No comments:
Post a Comment