सर झुकता हूं सजदे में
अदब से हर काम करता
ऐसे मैं शहीदों का सम्मान करता हूँ
चल रहा हूँ मशाल लेकर
चिरागों को रौशन करने का काम करता हूँ
शहादत की उनको याद दिलाया करता हूं
ऐसे मैं शहीदों का सम्मान करता हूँ
बनाता हूँ रास्ते नये पर
नक्शेकदमों पर उनके ही चलता हूँ
जिसमे धूल है उनके चरणों की
उस मिट्टी को नमन करता हूँ
ऐसे मैं अपने शहीदों सम्मान करता हूँ
हार न माने कभी भी जिन्दगी में
जीने का हुनर सिखाता हूँ
देखता रहूँ मैं रोज़ आइना
एसे काम करता हूँ
ऐसे मैं अपने शहीदों का सम्मान करता हूँ
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