Thursday, 21 August 2025

ए खुदा तेरी रौशनी से घर नही जलते

ए खुदा तेरी रौशनी से घर नही जलते
फिर क्यों तेरे बन्दे हाथों में राख लिये फिरते हैं
वक्त कभी रहता नही एकसा
आसमा में चमकते हैं जो तारे
अखिर तो जमी पर गिरते हैं
फिर क्यों तेरे बन्दे *ज़मीं* पर लड़ते फिरते हैं

आया ही नही जीने का सलिका
गलती किससे कहां क्या हो गई
यही गिनाया करते है
क्यों तेरे बन्दे एसा करते है
ए खुदा तेरी रौशनी से घर नही जलते
फिर क्यों तेरे बन्दे हाथों में राख लिये फिरते हैं

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