सर झुकाता हूँ सजदे में
खुद पर गुमान करता हूँ
अदब से हर काम करता हूँ
ऐसे मैं अपने शिक्षकों का सम्मान करता हूँ
चल रहा हूँ मशाल लेकर
चिरागों को रौशन करने का काम करता हूँ
मुझे कोई पहचानता नही पर
हाथ जोड़कर नमस्कार करता हूँ
ऐसे मैं अपने शिक्षकों का सम्मान करता हूँ
बनाता हूँ रास्ते नये पर
नक्शेकदमों पर उनके ही चलता हूँ
जिसमे धूल है उनके चरणों की
उस मिट्टी को नमन करता हूँ
ऐसे मैं अपने शिक्षकों का सम्मान करता हूँ
हार न माने कभी भी जिन्दगी में
जीने का हुनर सिखाता हूँ
देखता रहूँ मैं रोज़ आईना
ऐसे काम करता हूँ
ऐसे मैं अपने शिक्षकों का सम्मान करता हूँ
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