जड़ें हो कामजोर तो पेड़ भी गिर जाते हैं खाली हाथ कप-कपाते पैरो पर भी
संभाले रखा हमने तो अपने आप को
जाने कैसे लोगों के जमीर गिर जाते हैं अपनी कीमत लेकर ही सुखते हैं
सच्ची आंखों से जब आंसू गिर जाते हैं
उम्र गुजर जाती है पहचान बनाने में
ठोकर खाकर भी संभल जाते हैं
कभी नहीं उठते वो जो नजरों से गिर जाते हैं
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