Thursday, 21 August 2025

बेजान शाख से पत्ते गिर जाते हैं

बेजान शाख से पत्ते गिर जाते हैं 
जड़ें हो कामजोर तो पेड़ भी गिर जाते हैं खाली हाथ कप-कपाते पैरो पर भी 
संभाले रखा हमने तो अपने आप को
जाने कैसे लोगों के जमीर गिर जाते हैं अपनी कीमत लेकर ही सुखते हैं 
सच्ची आंखों से जब आंसू गिर जाते हैं 
उम्र गुजर जाती है पहचान बनाने में 
ठोकर खाकर भी संभल जाते हैं 
कभी नहीं उठते वो जो नजरों से गिर जाते हैं

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