घिरे हैं अपने ही ताने बानों में कहने को तो तन्हां हैं पर हैं नही
वो बातें भी किसी ओर की करते है घिरे हैं भीड़ में अपने पर हैं नही
रात गुजार दी मियां थोड़ा सा और खोज लो शायद कुछ मिल जाये वहम है
कुछ है नही
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