इन्सांनों सी फितरत खुदा किसी को ना दे
कुदरत में भी नही ये इतने रंग बदलते हैं
ये कितने डंग बदलते हैं
जाने कब अकेले रह जाऔ ये पल में संग बदलते हैं
इन्सांनों सी फितरत खुदा किसी को ना दे
ये कितने डंग बदलते हैं
ये कितने रंग बदलते हैं
इन्सांनों सी फितरत खुदा किसी को ना दे
कभी न सोचा होगा किसी ने
बोलो क्या बाकी रह गया
अब तो अंग बदलते हैं
इन्सांनों सी फितरत खुदा किसी को ना दे
ये कितने रंग बदलते हैं
ये कितने डंग बदलते हैं
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