Tuesday, 19 August 2025

तेरी हर अदा पर कविता बन जाये

कहना है बहुत कुछ
कैसे कहुँ *जाना*
कैसे मैं  तारीफ करुँ
तुम हो मेरी कल्पना
तुम सुबह हो, तुम शाम हो
तेरी कितनी तारीफ करुँ
मैं कवि तू कविता बन जाये
तेरी हर बात पर कविता बन जाये

इनायत बहुत है तेरे पास
पर तू जानता नही
तू मेरे चहरे का नूर है
तू मेरा गुरुर है
तेरी कितनी मैं तारीफ करुँ
मैं कवि तू कविता बन जाये
CCC

जिन्दा हुँ मैं तू मेरी रूह है
जुदा ना होना कभी
जिन्दा हो, जिन्दा ही रहना
वाज़िब है उनका पागल कहना
वो इतना ही जानते हैं
पर तेरी मैं तारीफ करुँ
कि मैं कवि तू कविता बन जाये
तेरी हर बात पर कविता बन जाये









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