Monday, 2 December 2024

मेरे ख्वाब छोटे हैं

मेरे ख्वाब छोटे हैं
पर इनमे जान बहुत है
ये छोटे छोटे बादलों की तरह हैं
मेरी सूखी ज़िन्दगी में बरस कर
मुझे तर कर जाते हैं

मेरे ख्वाब छोटे हैं
पर इनमे जान बहुत है
ये दुआओं की तरह हैं
मुझे ताक़त देते है

मेरे ख्वाब छोटे हैं
पर इनमे जान बहुत है
ये लोरी की तरह हैं
जागते नहीं
सुकून देते हैं

मेरे ख्वाब छोटे हैं
पर इनमे जान बहुत है
ये मंजिल की और जाती
पगडण्डी की तरह हैं
मुझे रास्ता दिखाते हैं

मेरे ख्वाब छोटे हैं
पर इनमे जान बहुत है
ये मासूम बच्चों की तरह हैं
छल नहीं करते
मुझे सच ही बताते है

Saturday, 17 August 2024

खुश किस्मत होते हैं वो कागज़

खुश किस्मत होते हैं वो कागज़ जिन पर मोहोब्बत के पैगाम लिखे जाते हैं 
कभी सीने से कभी माथे से कभी होटों से लगाए जाते हैं
 
खुश किस्मत होते हैं वो कागज़ जिन पर मोहोब्बत के पैगाम लिखे जाते हैं 

कभी तकिये के नीचे कभी हाथों के पीछे कभी किताबों में छुपाए जाते है 

खुश किस्मत होते हैं वो कागज़ जिन पर मोहोब्बत के पैगाम लिखे जाते हैं

कभी खून से, कभी स्याही से, कभी अश्कों से लिखे जाते हैं 

खुश किस्मत होते हैं वो कागज़ जिन पर मोहोब्बत के पैगाम लिखे जाते हैं

तुलसी राम

Sunday, 28 July 2024

घड़ी

घड़ी देख रहा था की ये समय कभी कभी कितना धीमा चलता है कभी बहुत तेज 
घड़ी को देखकर एक बात और मन मैं आई घड़ी सजीव है या निर्जीव घड़ी जो हमारे जीवन को सही मैं जीवंत करती है हमें सही समय का अहसास कराती है

सजीव

कभी आपने गौर किया है कि हमारे आसपास की हर चीज़ एक आकृति में ढली हुई है? ये आकृतियाँ सिर्फ दिखने में खूबसूरत नहीं होतीं, बल्कि ये हमारे जीवन और हमारे आसपास की दुनिया के बारे में बहुत कुछ बताती हैं। वृत्त, अपनी पूर्णता और अनंतता के प्रतीक के रूप में, जीवन की गतिशीलता और सजीवता को दर्शाता है। सूर्य, चंद्रमा, फल, रोटी – ये सभी वृत्ताकार आकृतियाँ हमें जीवन के उस चक्र की याद दिलाती हैं जो लगातार चलता रहता है। वहीं, आयत, अपनी सीमितता और स्थिरता के कारण, निर्जीव वस्तुओं का प्रतीक है। टेबल, कुर्सी, मकान – ये सभी आयताकार आकृतियाँ हमारे जीवन में स्थिरता और व्यवस्था लाती हैं।
आज के समय में हम तेजी से बदलती दुनिया में जी रहे हैं। तकनीक ने हमारे जीवन को आसान तो बना दिया है, लेकिन साथ ही हमें मशीनों से भी जोड़ दिया है। हम स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स में इतने खो गए हैं कि हम प्रकृति और अपने आसपास के लोगों से दूर होते जा रहे हैं। इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर निर्जीव वस्तुओं को अधिक महत्व देने लगते हैं।
जीवन को सार्थक बनाने के लिए हमें निर्जीव वस्तुओं के साथ-साथ सजीवता को भी महत्व देना होगा। हमें प्रकृति के करीब जाना चाहिए, मानव संबंधों को मजबूत करना चाहिए, और अपने भीतर की उस सजीवता को जगाना चाहिए जो हमें इंसान बनाती है। आइए, हम सभी मिलकर इस बदलती दुनिया में सजीवता को अपना केंद्र बनाएं। आइए, हम प्रकृति के करीब जाएं, मानवता को बढ़ावा दें, और जीवन को एक खूबसूरत अनुभव बनाएं।

Sunday, 3 March 2024

AUM GLOBAL ART CENTER

AUM GLOBAL ART CENTER
प्रकृति की गोद में, यह जगह बहुत प्यारी है
हरे घने हैं पेड़ यहाँ पर पंछियों को चहचहाट न्यारी है 
सुबह मैं है राग यहां की, सांझ में नागलिंगम की खुशबू भारी है 

क्या होता है काम यहां पर ? 
कला और कलाकारों को आगे बढ़ाने की तयारी है  
भारत की कला को विश्वपटल पर लाने की बारी है 

किसकी है सोच बड़ी ये ?
जिसकी कल्पना ने उड़ान मारी है
परिवार का साथ मिला और प्रभु कृपा से 
डॉक्टर नरेंद्र बोरलेप्वार की महनत ने बाजी मारी है 

आज दिनाक 02/03/2024 को AUM THE GLOBAL ART CENTER मुम्बई  के  शुभ परांगन में, और प्रकृति की गोद में पत्थर मूर्तिकला की अंतराष्ट्रीय  रेजीडेंसी शिल्परंग-5 का  सफलता पूर्वक  भव्य समापन समारोह मनाया गया।
 
में धन्यवाद करना चाहता हूं डॉक्टर नरेंद्र बोरलेप्वार जिन्होने कड़ी मेहनत और लगन से इतने बड़े कार्य को जीवंत आकार दिया और खुद के सपने को  पूर्ण करने की और अग्रसर हैं। 
मैं साथ ही ह्रदय की गहराइयों से धन्यवाद देना चाहता हूं  कला क्षेत्र के समकालीन मूर्तिकार परदीप जोगदंड का जिन्होने सभी सुविधाएं समय पर  उपलब्ध कराई और कार्य सफलता पूर्वक सम्पन्न हो सका।

जेजे स्कूल ऑफ आर्ट के डीन सर डॉ. विश्वनाथ साबले इस समापन समारोह के अतिथि रहे, साथ ही प्रतिष्ठित वरिष्ठ पत्रकार मंदार फणसे जी और युवराज मोहिते जी समारोह के मुख्य अतिथि रहे और समापन समारोह को यादगार बनाया आपसे सम्मन पाकर मैं गोर्नवानित महसूस कर रहा हूं। 
अंत में धन्यवाद GLOBAL ART CENTER की पूरी टीम का जिन्होने देर सवेरे हमारी सभी सुविधाओं का ध्यान रखा।