Monday, 1 September 2025

1. वजह तुम्हे चाहने की

ऐ फूल जो मेरे 
जीवन को महका रहे हैं
तुम ही हो वजह इन्हे चाहने की 

ऐ हवा के झोंके जो मेरे 
मेरे बालों को सहला रहे हैं 
तुम ही हो वजह इन्हे चाहने की 

ऐ बारिश की खुशबू और मिट्टी के रंग 
जो मुझे भा रहे हैं 
तुम ही हो वजह इन्हे चाहने की 

ऐ धूप की किरणें जो मुझ पर
मेरे चेहरे पर हँसी ला रहे हैं
तुम ही हो वजह इन्हें चाहने की

​ऐ रात, ऐ चाँदनी जो मेरे
मेरे ख्वाबों को सजा रहे हैं 
तुम ही हो वजह इसे चाहने की

​ऐ चाँद, तारे जो मेरे
रास्तों को दिखा रहे हैं
तुम ही हो वजह इन्हें चाहने की

​ऐ मीठी सी मुस्कान जो मेरे
मेरे होंठों पर ठहरी है 
और हटती ही नहीं 
तुम ही हो वजह इसे चाहने की





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