जैसे वीराने में कोई फूल खिल उठा।
अंधेरी रातों में चाँदनी बिखर गई,
पतझड़ में जैसे बहार आ गई।
हर कोना खुशी से झूम उठा,
हर दीवार पर रौनक आ गई।
जैसे पूजा की थाली में दीप जल उठा,
आपके आने की खुशी में घर महक उठा।
अब सूनापन कहीं नहीं ठहरता,
हर तरफ बस आपका ही जिक्र है।
इस दिल में भी एक रोशनी हुई,
किसी का अब कोई नहीं डर है।
आपके कदम पड़े तो साँसों में इत्र घ
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