एक मुकम्मल जहाँ होती है
दूकानदार दिन भर बैठे रहते है
ग्राहक की चाह में
और बूढ़ी आंखे भी टिकी रहती हैं
खिड़की पर बाट देखते हुऐ
बचपन गुजर जाता है
खिड़की पर लटकते हुऐ
खिड़की अपने आप में
एक मुकम्मल जहाँ होती है
खिड़की से ही मिलती सारी सहूलियतें
खाने की चीजें, पीने की चीजें, टिकट सिनेमा हॉल की
खिड़की से ही देखा था मैंने उसको
और खिड़की पर ही छोड़ दिया
खिड़की अपने आप में
एक मुकम्मल जहाँ होती है
अब तो सबके हाथों में हैं
अपनी अपनी खिड़कियां
और झाँकते रहते है पूरी दुनियां में
एक दूसरे की दुनिया में
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