Friday, 2 January 2026

12 तुम बिन

वैसा ही हैं मौसम और समय पूरा है
पर तुम बिन कुछ अधूरा है
वैसा ही हैं फूलों का रंग खुशबू भी है 
पर तुम बिन कुछ अधूरा सा है
पक्षी गा रहे हैं
और भवरे भी गुनगुना रहे हैं 
पर तुम बिन कुछ अधूरा सा है
तुम्हारे होने से ही होगा पूरा 
जो ये कुछ अधूरा सा है

सितारे चमकते हैं पहले की ही तरह     रातें  भी गुजरती हैं सवेरे की ही तरह  मगर नींद आँखों से जैसे खफा है          तेरी यादों का ही बस हर तरफ पहरा है    पर तुम बिन कुछ अधूरा सा है


 

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