पर तुम बिन कुछ अधूरा है
वैसा ही हैं फूलों का रंग खुशबू भी है
पर तुम बिन कुछ अधूरा सा है
पक्षी गा रहे हैं
और भवरे भी गुनगुना रहे हैं
पर तुम बिन कुछ अधूरा सा है
तुम्हारे होने से ही होगा पूरा
जो ये कुछ अधूरा सा है
सितारे चमकते हैं पहले की ही तरह रातें भी गुजरती हैं सवेरे की ही तरह मगर नींद आँखों से जैसे खफा है तेरी यादों का ही बस हर तरफ पहरा है पर तुम बिन कुछ अधूरा सा है
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