Wednesday, 31 December 2025

10 आओ की ऐसे आदमी को ढूंढ़ते

आओ किसी ऐसे आदमी को खोजते हैं जिसने ना चक्की हो कभी हार
जिसने न मानी हो कभी हार
जो आगे ही बढ़ता रहा हो
और संतुष्ट हो अपनी जिंदगी से 

आओ किसी ऐसे आदमी को खोजते हैं
जो रहा हो हमेशा उजालों में
जिसने अंधेरा कभी देखा ही ना हो मुस्कुराते मुस्कुराते ही कटी हो जिंदगी
गम का इसके आसपास भी 
कोई साया ना हो 
आओ किसी ऐसे आदमी को ढूंढते हैं
अपने ही दम पर जिसने जी हो जिंदगी ईश्वर को जिसने पुकार ना हो किसी ऐसे आदमी को ढूंढते हैं

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