बेकरारी बढ्ने लगी है
तुमसे दूर जाने के बाद
हवा गुम्ं है मौसम भी रुखा रुखा है
कोई सुकून दिल को सहलाता नही
धड़कने बढ्ने लगी हैं
तुमसे दूर जाने के बाद
तन झुटा पर मन सच्चा है
खुबसूरती के मायने बदलने लगे हैं
मन भारी, आँखे बोझल सी हैं
हरफ़ों में, आयतों में, तेरा नाम देखते हैं
तुमसे दूर जाने के बाद
कैसे कोई इतना सता सकता है
रातों में जगा सकता है
जिन्दगी कुछ भी नही है
जाना तुमसे दूर जाने के बाद
No comments:
Post a Comment