Sunday, 27 March 2022

तुमसे दूर जाने के बाद

बेकरारी बढ्ने लगी है
तुमसे दूर जाने के बाद
हवा गुम्ं है मौसम भी रुखा रुखा है
कोई सुकून दिल को सहलाता नही
धड़कने बढ्ने लगी हैं
तुमसे दूर जाने के बाद

तन झुटा पर मन सच्चा है
खुबसूरती के मायने बदलने लगे हैं
मन भारी, आँखे बोझल सी हैं
हरफ़ों में, आयतों में, तेरा नाम देखते हैं
तुमसे दूर जाने के बाद

कैसे कोई इतना सता सकता है
रातों में जगा सकता है
जिन्दगी कुछ भी नही है
जाना तुमसे दूर जाने के बाद




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