पंख कुतर के पिंजरों में बिठा रखा है
लहू लोहान होना पड़ता है
आसमानों की लड़ाई में
महल चौबारे ढह गए केवल खंडर रह गए
घर पीछे रह जाते हैं उसूलों ली लड़ाई में
किनारे पर बिठा रखा है चलने भी नही देते
बेकसूर मारे जाते हैं बेलों की लड़ाई में
कच्ची खाने वाले भी रोटी सेक लेते है
सियासत के गर्म चूल्हे पर
अक्सर भूखा रहना पड़ता है उसूलों की लड़ाई में
ऐ वादे सारे सब झूठी बाते हैं
बस मीठी बातें है
झूठ के जंगल में सच को
हमेशा अकेला रहना पड़ता है वज़ूदों की लड़ाई में
No comments:
Post a Comment