Monday, 13 April 2026

घर आना अच्छा लगता है

कही नहीं है वों सुकून जो घर मैं मिलता है 
चला जाता हूँ कभी कभी बहुत दूर घर आने के लिए 
छोटा हो बड़ा, फर्क कहा पड़ता हैं रिश्ते निभा लिया करो क्योंकि घर ईंट पत्थरों से नहीं अपनों से बनता है 
क्योंकि कहीं नहीं है वों सीकून जो घर मैं मिलता है



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